रंगभूमि
प्रेमचंद
प्रेमचंद का उपन्यास
- मुफ़्त
- मुफ़्त
- सिर्फ़ पढ़ने के लिए
- अध्याय
- 50
- अध्याय
- मिनट
- ~1302
- मिनट
- पहली बार छपी
- 1925
- हिंदी
इस किताब के बारे में
अंधे भिखारी सूरदास की झोपड़ी और ज़मीन के बहाने प्रेमचंद का रचा विशाल उपन्यास। एक तरफ़ सिगरेट का कारख़ाना लगाने पर तुला पूँजीपति, दूसरी तरफ़ एक अकेला गरीब, जो हार मानना नहीं जानता। पूरे 50 अध्याय।
लेखक: प्रेमचंद (1880–1936)
विषय-सूची
- 1 अध्याय 1
- 2 अध्याय 2
- 3 अध्याय 3
- 4 अध्याय 4
- 5 अध्याय 5
- 6 अध्याय 6
- 7 अध्याय 7
- 8 अध्याय 8
- 9 अध्याय 9
- 10 अध्याय 10
- 11 अध्याय 11
- 12 अध्याय 12
- 13 अध्याय 13
- 14 अध्याय 14
- 15 अध्याय 15
- 16 अध्याय 16
- 17 अध्याय 17
- 18 अध्याय 18
- 19 अध्याय 19
- 20 अध्याय 20
- 21 अध्याय 21
- 22 अध्याय 22
- 23 अध्याय 23
- 24 अध्याय 24
- 25 अध्याय 25
- 26 अध्याय 26
- 27 अध्याय 27
- 28 अध्याय 28
- 29 अध्याय 29
- 30 अध्याय 30
- 31 अध्याय 31
- 32 अध्याय 32
- 33 अध्याय 33
- 34 अध्याय 34
- 35 अध्याय 35
- 36 अध्याय 36
- 37 अध्याय 37
- 38 अध्याय 38
- 39 अध्याय 39
- 40 अध्याय 40
- 41 अध्याय 41
- 42 अध्याय 42
- 43 अध्याय 43
- 44 अध्याय 44
- 45 अध्याय 45
- 46 अध्याय 46
- 47 अध्याय 47
- 48 अध्याय 48
- 49 अध्याय 49
- 50 अध्याय 50
यह किताब मुफ़्त क्यों है
- लेखक का निधन 1936 में हुआ; भारत में लेखक की मृत्यु के 60 साल बाद (1997 से) कॉपीराइट ख़त्म।
- First published in 1925 (before 1931), so public domain in the United States.
- स्रोत: हिन्दी विकिस्रोत (Hindi Wikisource) — सरस्वती प्रेस, बनारस (मूल्य 8 रुपये) का स्कैन
- पूरा उपन्यास, सभी 50 अध्याय। पाठ विकिस्रोत पर जाँचा हुआ है; कहीं-कहीं वर्तनी की छोटी गलती हो सकती है।