निर्मला
प्रेमचंद
प्रेमचंद का उपन्यास
- मुफ़्त
- मुफ़्त
- सिर्फ़ पढ़ने के लिए
- अध्याय
- 25
- अध्याय
- मिनट
- ~333
- मिनट
- पहली बार छपी
- 1927
- हिंदी
इस किताब के बारे में
एक कम उम्र की लड़की का बेमेल विवाह और उसके बाद की पूरी ज़िंदगी। दहेज और बेमेल विवाह की कुप्रथा पर लिखा प्रेमचंद का यह उपन्यास हिंदी साहित्य के सबसे मार्मिक उपन्यासों में गिना जाता है। पूरे 25 परिच्छेद।
लेखक: प्रेमचंद (1880–1936)
विषय-सूची
- 1 पहला परिच्छेद
- 2 दूसरा परिच्छेद
- 3 तीसरा परिच्छेद
- 4 चौथा परिच्छेद
- 5 पाँचवाँ परिच्छेद
- 6 छठा परिच्छेद
- 7 सातवाँ परिच्छेद
- 8 आठवां परिच्छेद
- 9 नवाँ परिच्छेद
- 10 दसवाँ परिच्छेद
- 11 ग्यारहवाँ परिच्छेद
- 12 बारहवाँ परिच्छेद
- 13 तेरहवां परिच्छेद
- 14 चौदहवाँ परिच्छेद
- 15 पन्द्रहवाँ परिच्छेद
- 16 सोलहवाँ परिच्छेद
- 17 सत्रहवाँ परिच्छेद
- 18 अठारहवाँ परिच्छेद
- 19 उन्नीसवाँ परिच्छेद
- 20 बीसवाँ परिच्छेद
- 21 इक्कीसवाँ परिच्छेद
- 22 बाईसवाँ परिच्छेद
- 23 तेईसवाँ परिच्छेद
- 24 चौबीसवाँ परिच्छेद
- 25 पच्चीसवाँ परिच्छेद
यह किताब मुफ़्त क्यों है
- लेखक का निधन 1936 में हुआ; भारत में लेखक की मृत्यु के 60 साल बाद (1997 से) कॉपीराइट ख़त्म।
- First published in 1927 (before 1931), so public domain in the United States.
- स्रोत: हिन्दी विकिस्रोत (Hindi Wikisource) — चाँद कार्यालय, इलाहाबाद का स्कैन
- पूरा उपन्यास, सभी 25 परिच्छेद। पाठ स्कैन से टाइप किया गया है, इसलिए कहीं-कहीं वर्तनी की छोटी गलतियाँ हो सकती हैं।